चंडीगढ़: पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। तलवंडी साबो में भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के दौरान चौहान ने आरोप लगाया कि राज्य में नशे का कारोबार जारी है और सवाल उठाया कि नशा तस्करों को संरक्षण कौन दे रहा है।
‘पंजाब का मुखिया ही नशा करके विधानसभा पहुंच जाता है’
शिवराज सिंह चौहान ने भगवंत मान पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा, “पंजाब का तो मुखिया ही नशा करके विधानसभा में पहुंच जाता है।” उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परिवारों का जिक्र करते हुए दावा किया कि कुछ परिवारों की महिलाओं को अपनी बात रखने के दौरान पुलिस थाने में बैठाया गया।
चौहान ने सवाल उठाया कि आखिर नशे के सौदागरों को संरक्षण कौन दे रहा है और किसकी छाया में उनका कारोबार फल-फूल रहा है। उन्होंने पंजाब सरकार से नशे की समस्या और कथित तस्करी नेटवर्क को लेकर जवाब मांगा।
तलवंडी साबो से ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ में हुए शामिल
शिवराज चौहान सोमवार को तलवंडी साबो पहुंचे, जहां उन्होंने तख्त श्री दमदमा साहिब में मत्था टेका। इसके बाद उन्होंने भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के चौथे चरण को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे।
भाजपा ने 18 सितंबर को पंजाब में चार मार्गों से इस अभियान की शुरुआत की थी। पार्टी के अनुसार, चारों यात्राएं राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचेंगी और करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होंगी।
छह महीने में ड्रग नेटवर्क खत्म करने का दावा
तलवंडी साबो के कार्यक्रम में चौहान ने यह भी कहा कि अगर भाजपा पंजाब में सरकार बनाती है तो छह महीने के भीतर राज्य के ड्रग सप्लाई नेटवर्क को खत्म करने और नशे के कारोबार से कथित तौर पर बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। यह चौहान का राजनीतिक दल की ओर से किया गया दावा है।
AAP ने भाजपा के अभियान पर उठाए सवाल
नशे के मुद्दे पर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। AAP नेताओं ने भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को राजनीतिक अभियान बताया है। अरविंद केजरीवाल ने भी नशे की सप्लाई को लेकर पंजाब के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों और बंदरगाहों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
इस बीच पंजाब सरकार ने भी नशे के खिलाफ अपने ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत कार्रवाई, जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और नशा मुक्ति एवं पुनर्वास पर जोर देने की बात कही है।
