हैदराबाद के निज़ाम की 173 दुर्लभ ज्वेलरी भारत की सबसे अनमोल धरोहरों में शामिल हैं। इनमें हीरे, पन्ने, मोती, माणिक और प्रसिद्ध जैकब डायमंड जैसे बेशकीमती रत्न शामिल हैं। ये सभी गहने 1995 से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मुंबई स्थित उच्च सुरक्षा वाली तिजोरी में रखे गए हैं।
इन गहनों का इतिहास केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के शाही इतिहास, संस्कृति और राजनीति का प्रतीक भी हैं। इस संग्रह में ताज, हार, बाजूबंद, झुमके, कमरबंद, कंगन जैसी शाही वस्तुएं शामिल हैं। खासकर जैकब डायमंड, दुनिया के पांचवें सबसे बड़े हीरे के रूप में, शाही वैभव का सर्वोच्च प्रतीक है।
साल 1995 में भारत सरकार ने इन गहनों को निज़ाम परिवार से मात्र 250 करोड़ रुपये में खरीदा था, जो वर्तमान मूल्यांकन के हिसाब से बेहद कम कीमत थी। इन गहनों को 2001, 2007 और 2019 में सीमित अवधि के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली में प्रदर्शित किया गया। हर बार भारी सुरक्षा और बीमा व्यवस्था के तहत यह प्रदर्शन हुआ।
हालांकि, हैदराबाद और तेलंगाना के सांस्कृतिक संगठनों और नेताओं की मांग है कि इन अमूल्य गहनों को हैदराबाद में स्थायी म्यूज़ियम में रखा जाए ताकि स्थानीय लोग और देशवासियों को इनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता का अनुभव हो। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हाल ही में राज्यसभा में इस पर जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल सरकार की कोई योजना नहीं है।
इतिहास में दिलचस्प तथ्य यह भी है कि निज़ामों ने जैकब डायमंड को पेपरवेट की तरह इस्तेमाल किया था। तीन सदियों तक हैदराबाद पर शासन करने वाले निज़ामों की संपत्ति इतनी विशाल थी कि आखिरी निज़ाम मीर उस्मान अली खान को टाइम मैगज़ीन ने दुनिया का सबसे अमीर आदमी कहा।
ये गहने न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत, बल्कि शाही वैभव और इतिहास की चमकदार गवाही भी हैं। सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या इन्हें कभी हैदराबाद में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया जाएगा या हमेशा RBI की तिजोरी में बंद रखा जाएगा।
