पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले में मंगलवार को पोलियो टीकाकरण टीम पर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलीबारी कर दी, जिससे टीम की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया। यह हमला मीर अली तहसील में हुआ, जो अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ और लंबे समय से हिंसा व अस्थिरता का केंद्र रहा है।
पुलिस ने पुष्टि की है कि हमलावरों ने अचानक गोलीबारी शुरू की और मौके से फरार हो गए। पुलिस ने इलाके को घेर कर ढूढ़ने के लिए व्यापक छापेमारी अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। किसी संगठन ने जिम्मेदारी भी नहीं ली है।
पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन अभियान को वर्षों से भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और उसके सीमावर्ती आदिवासी इलाकों में।
✔️ इन इलाकों में पोलियो टीमों पर बार-बार हमले हो चुके हैं।
✔️ पिछले दशक में सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की जान चली गई है।
✔️ कुछ रिपोर्टों के मुताबिक 2012 से अब तक 200 से अधिक लोग पोलियो अभियान से जुड़े हमलों में मारे गए हैं, जिनमें अधिकांश इसी प्रांत में हुए हैं।
इन हमलों के पीछे मुख्य रूप से यह कारण बताए जाते हैं:
- धार्मिक कट्टरता और अफवाहें कि पोलियो वैक्सीन पश्चिमी साजिश का हिस्सा है।
- कुछ उग्र समूहों, जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), का दावा कि वैक्सीन बच्चों को नुकसान पहुंचाती है या यह नसबंदी का जरिया है।
इन अफवाहों के कारण कई समुदाय वैक्सीनेशन से इनकार कर देते हैं, जिससे पोलियो वायरस अब भी सक्रिय रूप से फैलने का खतरा बना हुआ है। पाकिस्तान दुनिया के उन कम देशों में शामिल है जहां पोलियो का वाइल्ड वायरस अभी भी मौजूद है।
पाकिस्तानी सरकार और स्वास्थ्य विभाग पोलियो उन्मूलन अभियान को जारी रखे हुए हैं और हर अभियान में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए जाते हैं।
✔️ पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान
➡️ हजारों महिला स्वास्थ्य कर्मी ग्रासरूट स्तर पर घर-घर जाकर वैक्सीन देते हैं।
➡️ उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस और लेवी फोर्स तैनात रहती है।
✔️ सरकार WHO, UNICEF और बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रही है।
फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समुदायों में जागरूकता नहीं बढ़ती और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक पोलियो का पुरा उन्मूलन मुश्किल होगा।
मीर अली में हुए इस हमले ने फिर दिखा दिया है कि पोलियो टीकाकरण टीमों की सुरक्षा कितनी संवेदनशील और जोखिम-भरी है।
ऐसे हमले आख़िर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जान लेते हैं,
और वैक्सीनेशन अभियान में रुकावट भी पैदा करते हैं,
जिससे पोलियो वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान ही वे दो देश हैं जहां आज भी पोलियो वायरस सक्रिय है और इसके खिलाफ लड़ाई जारी है।
