ऑस्ट्रेलिया में उस समय हलचल मच गई जब मेलबर्न और सिडनी में उतरे विमानों से कथित तौर पर ISIS से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई महिलाएं और बच्चे बाहर निकले। सरकार ने सीरिया के डिटेंशन शिविरों में वर्षों से रह रहे इन नागरिकों को वापस लाने की पुष्टि की है।
जानकारी के मुताबिक, एक विमान में तीन महिलाएं और आठ बच्चे मेलबर्न पहुंचे, जबकि दूसरे विमान में एक महिला और उसका बेटा सिडनी पहुंचे। दोनों उड़ानें कतर एयरवेज की थीं, जो दोहा से कुछ मिनट के अंतराल पर रवाना हुई थीं।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बुधवार को बताया कि कुल 13 लोगों को सीरिया के रेगिस्तानी शिविरों से वापस लाया गया है। इनमें अधिकतर बच्चे शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन महिलाओं के खिलाफ ISIS के तथाकथित “खिलाफत” में बिताए समय को लेकर आपराधिक जांच की जा सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की सरकार इससे पहले भी दो बार सीरिया के डिटेंशन कैंपों से महिलाओं और बच्चों को वापस ला चुकी है। हालांकि पहले सरकार इन लोगों को वापस लाने के खिलाफ थी और उसने उन महिलाओं की आलोचना की थी जिन्होंने ISIS का समर्थन करते हुए सीरिया जाने का फैसला किया था।
ऑस्ट्रेलियाई पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पिछले एक दशक से उन नागरिकों की जांच कर रही हैं, जो सीरिया और इराक में ISIS से जुड़े रहे। जांच में आतंकवाद, मानवता के खिलाफ अपराध और यजीदी महिलाओं को गुलाम बनाए जाने जैसे मामलों को शामिल किया गया है।
जोशुआ रूज, जो Deakin University से जुड़े हैं, ने कहा कि कुछ महिलाओं ने भी ISIS शासन के दौरान हिंसा और कठोर शरिया कानून लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, “इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से समझने की जरूरत है।”
बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था Save the Children ने पहले अदालत में याचिका दायर कर सरकार से सीरिया में फंसे ऑस्ट्रेलियाई बच्चों को वापस लाने की मांग की थी।
संस्था के मुख्य कार्यकारी मैट टिंकलर ने कहा कि अब सबसे ज्यादा ध्यान बच्चों के पुनर्वास और बेहतर भविष्य पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने युद्ध और हिंसा के माहौल में बचपन बिताया है, इसलिए उन्हें ऑस्ट्रेलिया में सामान्य जीवन शुरू करने का अवसर मिलना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन महिलाओं और बच्चों की वापसी के बाद ऑस्ट्रेलिया के सामने सुरक्षा, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन जैसी बड़ी चुनौतियां खड़ी होंगी।
