YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-प्रधान फिल्म ‘अल्फा’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। आलिया भट्ट और शरवरी की जोड़ी, बॉबी देओल का खतरनाक विलेन अवतार, अनिल कपूर की दमदार मौजूदगी और ऋतिक रोशन का सरप्राइज कैमियो फिल्म को बड़े स्तर का अनुभव देते हैं। हालांकि, जब बात कहानी और भावनात्मक जुड़ाव की आती है तो फिल्म अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाती।
फिल्म की कहानी RAW चीफ विक्रांत कौल (अनिल कपूर) और उनकी जुड़वां बेटियों सीता (आलिया भट्ट) और दुर्गा (शरवरी) के इर्द-गिर्द घूमती है। जन्म के समय मां की मौत के बाद दोनों बहनों की जिंदगी अलग-अलग रास्तों पर चली जाती है।
सीता का अपहरण फतेह सिंह लखावत (बॉबी देओल) कर लेता है और उसे एक निर्दयी योद्धा के रूप में तैयार करता है। दूसरी ओर दुर्गा सुरक्षित माहौल में बड़ी होती है। वर्षों बाद परिस्थितियां दोनों बहनों को आमने-सामने ला खड़ा करती हैं। धीरे-धीरे परिवार से जुड़े कई राज खुलते हैं और दोनों बहनें अपने सबसे बड़े दुश्मन के खिलाफ एकजुट हो जाती हैं।
आलिया भट्ट फिल्म की केंद्रीय किरदार हैं। उन्होंने एक्शन और गंभीर किरदार निभाने की पूरी कोशिश की है। शुरुआती हिस्से में उनका लुक और स्क्रीन प्रेजेंस थोड़ा असहज लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह अपने किरदार में बेहतर नजर आती हैं।
शरवरी को अपेक्षाकृत कम स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन जितनी देर वह पर्दे पर रहती हैं, प्रभाव छोड़ती हैं। खासकर एक्शन दृश्यों में उनका आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रभावित करती है।
बॉबी देओल एक बार फिर निगेटिव रोल में छा जाते हैं। फतेह सिंह लखावत के रूप में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस दमदार है और उनका किरदार फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है।
अनिल कपूर एक अनुभवी कलाकार की तरह अपने किरदार में संतुलन और भावनात्मक गहराई लेकर आते हैं। सीमित स्क्रीन टाइम में दिव्येंदु भट्टाचार्य भी प्रभाव छोड़ते हैं।
फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज ऋतिक रोशन की ‘कबीर’ के रूप में एंट्री है। उनका कैमियो छोटा जरूर है, लेकिन प्रभावशाली है। उनके आते ही फिल्म की रफ्तार और रोमांच दोनों बढ़ जाते हैं, जिससे दर्शकों को स्पाई यूनिवर्स के अगले अध्याय की झलक भी मिलती है।
निर्देशक शिव रवैल ने बड़े स्तर की एक्शन फिल्म बनाने की कोशिश की है और इसमें काफी हद तक सफल भी रहे हैं। एक्शन सीक्वेंस, सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर और प्रोडक्शन वैल्यू फिल्म को भव्य बनाते हैं।
बैकग्राउंड म्यूजिक एक्शन दृश्यों को और प्रभावी बनाता है। फिल्म में संवाद कम हैं और कहानी को अधिकतर एक्शन के जरिए आगे बढ़ाया गया है।
क्या अच्छा है?
शानदार एक्शन सीक्वेंस
आलिया भट्ट और शरवरी की मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस
बॉबी देओल का दमदार विलेन
ऋतिक रोशन का कैमियो
बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर और हाई प्रोडक्शन वैल्यू
क्या कमजोर है?
कहानी में भावनात्मक गहराई की कमी
स्क्रीनप्ले कई जगह कमजोर पड़ता है
‘अल्फा’ ड्रग का कॉन्सेप्ट पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो पाया
शरवरी के किरदार को पर्याप्त विस्तार नहीं मिला
कई ट्विस्ट पहले से अनुमानित लगते हैं
‘अल्फा’ बॉलीवुड की महिला-प्रधान स्पाई फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। फिल्म तकनीकी रूप से मजबूत है, एक्शन शानदार है और कलाकारों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन कमजोर कहानी और भावनात्मक जुड़ाव की कमी इसे यादगार बनने से रोक देती है।
अगर आप YRF स्पाई यूनिवर्स, बड़े पैमाने के एक्शन और स्टार पावर के लिए फिल्म देखना चाहते हैं, तो ‘अल्फा’ आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन यदि आपकी प्राथमिकता मजबूत कहानी और गहरे भावनात्मक असर वाली फिल्म है, तो यह फिल्म आपको अधूरा संतोष दे सकती है।
