नई दिल्ली: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के करीब सात महीने बाद पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया गया है। नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। माना जा रहा है कि संगठन में किए गए ये बदलाव अगले तीन वर्षों में होने वाले विधानसभा और अन्य चुनावों को ध्यान में रखकर किए गए हैं।
वसुंधरा राजे और पीयूष गोयल जैसे अनुभवी नेताओं पर भरोसा
नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को शामिल किया गया है। दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे को चुनावी राजनीति और संगठन का लंबा अनुभव है।
वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को करीब 12 साल बाद एक बार फिर पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। चुनावी दौर में पार्टी के वित्तीय प्रबंधन में कोषाध्यक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चुनाव जिताने वाले नेताओं को राष्ट्रीय जिम्मेदारी
बीजेपी ने राज्यों में चुनावी रणनीति को सफल बनाने वाले नेताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं। सुनील बंसल, विप्लव देव और विनोद तावड़े जैसे नेताओं को संगठन में अहम भूमिका मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी राज्यों में चुनावी प्रबंधन के अपने सफल मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना चाहती है।
सोशल मीडिया पर भी विशेष जोर
नई टीम में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी खास महत्व दिया गया है। चुनावी राजनीति में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए पार्टी ने इस मोर्चे पर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की तैयारी की है।
कांग्रेस से बीजेपी में आए अनिल एंटनी, रोहन गुप्ता और मनप्रीत सिंह बादल जैसे नेताओं को संगठन में जगह मिलना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे संदीप पाठक को संगठन में जिम्मेदारी मिलना बताता है कि दूसरी पार्टियों से बीजेपी में आने वाले नेताओं के लिए संगठन में जगह बनी हुई है।
युवाओं और महिलाओं को ज्यादा जिम्मेदारी
नई टीम में पहले की तुलना में युवा नेताओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। बीजेपी की राजनीति में लंबे समय से युवा और महिला मतदाताओं को महत्वपूर्ण माना जाता रहा है और अब पार्टी संगठन में भी इसका असर दिखाई दे रहा है।
‘दिमागी नक्सल’ को लेकर सियासत तेज, बीजेपी ने विपक्ष पर साधा निशाना
‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के इस शब्द के इस्तेमाल के बाद बीजेपी और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गया है।
बीजेपी का आरोप है कि कुछ विपक्षी नेता ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि नक्सलवाद केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी वैचारिक और डिजिटल माध्यमों से अराजकता फैलाने की कोशिश की जा सकती है।
विपक्ष की ओर से हालांकि ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया जाता रहा है। इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।
‘वंदे मातरम्’ विवाद पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
स्वतंत्रता दिवस के दौरान कांग्रेस कार्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सामने आए वीडियो को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली समेत कुछ अन्य शहरों में दोनों नेताओं के खिलाफ पुलिस शिकायतें भी किए जाने की खबर है।
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने इसे रोकने का इशारा किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की।
कांग्रेस ने दी सफाई
कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् रोकने का इशारा नहीं कर रही थीं। पार्टी के मुताबिक उनके पास खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उम्र अधिक है और उन्हें लंबे समय तक खड़े रहने में परेशानी हो रही थी। इसी वजह से सोनिया गांधी ने उनके लिए कुर्सी की व्यवस्था करने का संकेत दिया था।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि राष्ट्रगीत के गायन को लेकर पार्टी की अपनी परंपरा और निर्धारित प्रक्रिया है।
फिलहाल वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर पुलिस शिकायतों तक पहुंच गया है। शिकायतों पर पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं।
