ताइपे।
दुनिया के सबसे साहसी रॉक क्लाइंबर माने जाने वाले एलेक्स होनोल्ड ने एक बार फिर नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। अमेरिकी क्लाइंबर ने ताइवान की प्रतिष्ठित गगनचुंबी इमारत ताइपे 101 पर बिना किसी रस्सी, हार्नेस या सुरक्षा उपकरण के चढ़ाई पूरी कर दी। इस खतरनाक कारनामे ने न सिर्फ क्लाइंबिंग जगत, बल्कि आम लोगों को भी हैरानी में डाल दिया।
करीब 508 मीटर ऊंची ताइपे 101 इमारत 101 मंज़िलों की है और इसे शहरी वास्तुकला का अजूबा माना जाता है। एलेक्स ने इस इमारत पर फ्री-सोलो क्लाइंबिंग की, जिसमें जरा सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती थी।
रविवार सुबह जब एलेक्स ने चढ़ाई शुरू की, तो इमारत के आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर कदम के साथ लोगों की सांसें थमी रहीं। एलेक्स बेहद संयम और संतुलन के साथ इमारत की दीवारों पर आगे बढ़ते रहे। लगभग डेढ़ घंटे बाद जब वे शिखर पर पहुंचे, तो नीचे खड़े लोगों ने तालियों और नारों से उनका स्वागत किया।
क्लाइंबिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार, ताइपे 101 का मध्य हिस्सा सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। यहां इमारत की संरचना जटिल हो जाती है और पकड़ बनाने के लिए बेहद कम जगह मिलती है। बावजूद इसके, होनोल्ड ने बिना किसी सहारे इस हिस्से को भी सफलतापूर्वक पार कर लिया।
शिखर पर पहुंचने के बाद एलेक्स होनोल्ड ने कहा,
“ऊपर हवा बहुत तेज़ चल रही थी और एक पल को संतुलन बिगड़ने का डर था। लेकिन नजारा इतना खूबसूरत था कि सारी थकान दूर हो गई। यह मेरे जीवन के सबसे खास अनुभवों में से एक है।”
होनोल्ड इससे पहले अमेरिका के एल कैपिटन जैसे खतरनाक पहाड़ों पर बिना रस्सी चढ़ाई कर चुके हैं, जिसे दुनिया की सबसे जोखिम भरी फ्री-सोलो चढ़ाइयों में गिना जाता है। हालांकि, ताइपे 101 जैसी शहरी इमारत पर बिना सुरक्षा के चढ़ाई करना उनके करियर की अब तक की सबसे साहसिक उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
हालांकि साल 2004 में फ्रांस के क्लाइंबर एलेन रॉबर्ट ने ताइपे 101 पर चढ़ाई की थी, लेकिन उन्होंने सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया था। एलेक्स होनोल्ड ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने इस इमारत को पूरी तरह फ्री-सोलो स्टाइल में फतह किया।
एलेक्स का यह कारनामा साबित करता है कि इंसानी हौसला, सही तैयारी और आत्मविश्वास के साथ असंभव दिखने वाली ऊंचाइयों को भी छू सकता है।
