बांग्लादेश की अपदस्थ नेता शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने 12 फरवरी 2026 को होने जा रहे आम चुनावों की कड़ी आलोचना की है और अंतरिम सरकार पर न केवल लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है बल्कि यह भी कहा है कि देश में लाखों लोगों के मताधिकार छीन लिए गए हैं।
हसीना अपने देश से बाहर भारत में निर्वासित हैं और उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनाव समावेशी, स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं हैं। उनका आरोप है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उनकी पार्टी अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से रोक दिया, जिससे उनके समर्थकों को मतदान का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
• शेख हसीना ने चेतावनी दी है कि राजनीतिक भागीदारी से बड़ी संख्या में लोगों को वंचित किया जाना, देश में असंतोष और अस्थिरता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि
➡️ “जब आबादी के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से वंचित किया जाता है, तो संस्थानों की वैधता खत्म होती है और अस्थिरता की स्थितियाँ पैदा होती हैं।”
• राजनीतिक हिंसा के भी संकेत मिल रहे हैं — चुनाव की घोषणा के बाद से कम से कम 16 कार्यकर्ता मारे गए हैं, जिससे चुनाव से पहले भय का माहौल बना हुआ है।
• इसके अलावा रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि महिल उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई है, जो बढ़ती कानून व्यवस्था की समस्याओं को दर्शाता है।
चुनाव का माहौल
• बांग्लादेश में 127 मिलियन से अधिक मतदाता 12 फरवरी को वोट डालने वाले हैं। यह चुनाव 2024 के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद देश में होने वाला पहला राष्ट्रीय चुनाव है।
• हालांकि अंतरिम सरकार ने कहा है कि यह चुनाव मुक्त और निष्पक्ष होगा और इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है तथा विदेशी पर्यवेक्षकों को भी आमंत्रित किया गया है, लेकिन हसीना सहित कई आलोचकों का कहना है कि चुनाव समावेशी नहीं है क्योंकि उनके समर्थक और पार्टी चुनाव प्रक्रिया से बाहर हैं।
अन्य राजनीतिक घटनाक्रम
• बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान ने भी मतों में हेरफेर की आशंका जताई है और लोकतंत्र की प्रक्रिया को लेकर चेतावनी दी है।
• चुनाव के पहले अंतरराष्ट्रीय शक्ति समीकरण बदल रहा है और देश के राजनीतिक परिदृश्य में विदेशों के हित भी शामिल होने लगे हैं, जो आगे की राजनीति को प्रभावित करेंगे।
स्थिति का सार
🔹 शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर चुनाव को निष्पक्ष व लोकतांत्रिक नहीं कहा।
🔹 अवामी लीग जैसे बड़े दल का चुनाव से बाहर रहना मतदाता असंतोष बढ़ा रहा है।
🔹 राजनीतिक हिंसा और मतदाता असंतोष के बीच 12 फरवरी का चुनाव बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
