देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना-2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। पहले चरण में आवासों का सूचीकरण और गणना अप्रैल से शुरू किए जाने की तैयारी है। इसके लिए आवश्यक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है और प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारियां भी तय कर दी गई हैं।
राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को जनगणना अधिकारी नामित किया है। प्रदेश के 11 नगर निगमों में आवासों की गणना का कार्य संबंधित नगर आयुक्त कराएंगे, जबकि नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्रामीण और शेष क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी जिलाधिकारियों के पास होगी। गणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों का प्रशिक्षण 10 मार्च से शुरू किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने 2027 में देशव्यापी जनगणना कराने का निर्णय लिया है। इस बार जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी—
- पहला चरण: आवासों का सूचीकरण और मकानों की गणना
- दूसरा चरण: व्यक्तियों की गणना, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण जुटाए जाएंगे
इस बार की जनगणना में जातीय गणना भी शामिल होगी। उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां जातीय जनगणना की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी।
जिलाधिकारियों के साथ उप जिलाधिकारी, और नगर आयुक्तों के साथ उप नगर आयुक्त इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। जनगणना कार्य को समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
उत्तराखंड एक सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है, जहां कई रक्षा प्रतिष्ठान और सैन्य संस्थान स्थित हैं। ये क्षेत्र प्रायः कैंटोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आते हैं।
कैंटोनमेंट बोर्ड के तहत आने वाली सिविल आबादी की गणना जिलाधिकारी की देखरेख में कराई जाएगी।
वहीं सैन्य क्षेत्रों और रक्षा संस्थानों की गणना रक्षा मंत्रालय के सहयोग से जनगणना प्रक्रिया के दौरान की जाएगी।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मचारियों को सही जानकारी देकर सहयोग करें, ताकि विकास योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें।
