लखनऊ में लगातार हो रही बिजली कटौती और बढ़ते जनआक्रोश के बीच उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 44 अधिशासी अभियंताओं का ट्रांसफर कर राजधानी के विभिन्न बिजली उपकेंद्रों पर तैनात किया गया है।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए अधिकारियों की नई तैनाती की जा रही है, ताकि भीषण गर्मी के दौरान राजधानी में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाया जा सके। लगातार बिजली कटौती को लेकर आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों का भी गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन और सड़क जाम भी किया।
इस बीच ए के शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद राज्य में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि 21 मई 2026 को दोपहर में बिजली की मांग 29,493 मेगावाट तक पहुंच गई थी, जबकि 22 मई की सुबह 3:19 बजे अधिकतम मांग 30,276 मेगावाट दर्ज की गई। दोपहर 2:30 बजे तक यह मांग बढ़कर 30,357 मेगावाट हो गई।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष दिन में अधिकतम 28,300 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी, जबकि इस बार मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। उन्होंने बताया कि रात के पीक ऑवर्स में बिजली की मांग 32,000 से 33,000 मेगावाट तक पहुंच रही है। ऊर्जा एक्सचेंजों में बिजली की कमी के बावजूद विभिन्न स्रोतों से बिजली खरीदकर प्रदेश में आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
बिजली संकट को लेकर राजधानी में विरोध प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं। उतरठिया अंडरपास पर सड़क जाम कर प्रदर्शन किए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीजीआई थाना में 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
वहीं राजेश्वर सिंह ने भी बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। सरोजिनी नगर विधायक ने ऊर्जा मंत्री को 10 पन्नों का पत्र लिखकर बिजली वितरण व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की। उन्होंने बार-बार बिजली गुल होने, कम वोल्टेज, ट्रांसफॉर्मर खराब होने और फीडर ट्रिपिंग जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भीषण गर्मी के दौरान स्थिति और खराब हो गई है।
