यरुशलम/न्यूयॉर्क: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि वह सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को संबोधित करने के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क जाएंगे। इस दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर यहूदी-विरोधी माहौल को बढ़ावा देने और शहर में विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया।
एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा, “ममदानी को मेरा जवाब है कि मैं न्यूयॉर्क आऊंगा। मैं संयुक्त राष्ट्र के मंच से इजरायल और अमेरिका-इजरायल संबंधों के समर्थन में अपनी बात रखूंगा और यहूदी समुदाय के पक्ष में सच बोलूंगा।”
नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ममदानी की टिप्पणियां हमास के प्रति नरम रुख को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर के हमलों में इजरायली नागरिकों पर हुए अत्याचारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और जो लोग हमास की आलोचना करने से बचते हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे कृत्यों का समर्थन करते हैं।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत जुलाई की शुरुआत में हुई थी, जब न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा था कि यदि बेंजामिन नेतन्याहू न्यूयॉर्क आते हैं तो उनकी गिरफ्तारी के सवाल पर वह अपने विधि विभाग के साथ विचार कर रहे हैं। इस बयान के बाद इजरायल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, वहीं अमेरिका में भी कई नेताओं ने ममदानी की आलोचना की।
बाद में ममदानी ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क शहर के पास किसी अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट को स्वतंत्र रूप से लागू करने का कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि संघीय सरकार चाहे तो वह अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के साथ सहयोग कर ऐसे मामलों में कार्रवाई कर सकती है।
ICC वारंट बना विवाद की वजह
यह पूरा विवाद अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) द्वारा बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को लेकर और अधिक चर्चा में आया। हालांकि, इजरायल ICC के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता और नेतन्याहू लगातार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
ट्रंप ने भी दिया था बयान
इस मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में नेतन्याहू को संबोधित करते हुए कहा था कि “अमेरिका में रहते हुए आपको किसी भी स्थिति में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।”
नेतन्याहू की प्रस्तावित न्यूयॉर्क यात्रा और इस पर जारी राजनीतिक बयानबाजी ने अमेरिका और इजरायल दोनों में बहस को तेज कर दिया है। अब सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान उनकी यात्रा और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
