नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा के बदलते स्वरूप, बच्चों की प्रतिभा पहचानने, स्क्रीन टाइम और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि हर बच्चा अलग क्षमता और प्रतिभा लेकर आता है। ऐसे में शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी खूबियों को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना भी जरूरी है।
हर बच्चे में होती है कोई न कोई खास प्रतिभा
शिक्षकों से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने पूछा कि अगर कोई बच्चा पढ़ाई में अपेक्षाकृत कमजोर है, तो क्या शिक्षक उसकी दूसरी प्रतिभाओं को पहचानने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हर व्यक्ति को किसी न किसी विशेष क्षमता के साथ भेजा है। इसलिए शिक्षक को बच्चों की अलग-अलग खूबियों, रुचियों और चुनौतियों को समझने का प्रयास करना चाहिए।
शिक्षकों ने भी बताया कि कक्षा में मौजूद प्रत्येक बच्चे की क्षमता अलग होती है। उनका प्रयास रहता है कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा दी जाए।
ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता पर भी हुई चर्चा
संवाद के दौरान एक शिक्षिका ने अपने शोध का विषय ब्रेस्ट कैंसर बताया। उन्होंने कहा कि आज भी इस विषय पर महिलाओं के बीच झिझक देखने को मिलती है। उनका प्रयास महिलाओं को बीमारी के शुरुआती संकेतों के प्रति जागरूक करने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रेरित करना है।
इस पर पीएम मोदी ने काशी में चलाए गए ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब बड़ी संख्या में महिलाएं आगे आकर स्वास्थ्य जांच करा रही हैं, जो जागरूकता बढ़ने का सकारात्मक संकेत है।
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि एक दिन में बड़ी संख्या में लोगों की जांच किए जाने का रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ है।
बच्चों में बढ़ रहा स्क्रीन टाइम का असर
पीएम मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को भी गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल एक तरह की आदत या एडिक्शन का रूप ले सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को खेलकूद और मैदान से जोड़ने पर उनका ध्यान स्क्रीन से हटाया जा सकता है। इसके साथ ही बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करने के लिए स्कूलों में नियमित कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
‘सिलेबस से बाहर निकलकर बच्चों की जिंदगी से जुड़ना होगा’
शिक्षक दिवस के मौके पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षकों को केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें बच्चों की वास्तविक जिंदगी, उनकी रुचियों और भावनाओं को भी समझना होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना चाहिए और शिक्षकों को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर बच्चों के जीवन में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
‘बचपन को मरने नहीं देना चाहिए’
पीएम मोदी ने शिक्षकों से खास तौर पर कहा कि बच्चों का बचपन जीवंत बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चे केवल पढ़ाई और अंकों तक सीमित न रहें, बल्कि उनके अंदर जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की इच्छा भी बनी रहनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों का बचपन बनाए रखने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने भीतर भी जिज्ञासा और बचपन की सहजता को जीवित रखें, ताकि वे बच्चों के साथ बेहतर तरीके से जुड़ सकें।
अंत में पीएम मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
