NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट से कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा से तीन दिन पहले ही प्रश्नपत्र के सवाल कथित तौर पर लीक हो गए थे और उन्हें WhatsApp, Telegram तथा ऑफलाइन क्लास के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। CBI ने इस पूरे नेटवर्क में NTA से जुड़े विषय विशेषज्ञों, कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और अन्य लोगों की भूमिका का दावा किया है।
चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले शुरू हो गई थी। आरोपियों ने अक्टूबर 2025 से ही छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क करना शुरू कर दिया था और कथित तौर पर किस्तों में लाखों रुपये वसूले गए।
स्पेशल क्लास में लिखवाए गए कथित लीक सवाल
CBI के अनुसार, केमिस्ट्री विषय के विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी ने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे में कथित तौर पर ‘स्पेशल क्लास’ आयोजित की। आरोप है कि इन क्लास में छात्रों को वही सवाल और उनके जवाब लिखवाए गए, जो बाद में NEET परीक्षा में पूछे गए।
लातूर में भी कुछ छात्रों को इसी तरह की विशेष क्लास दिए जाने का दावा चार्जशीट में किया गया है। जांच एजेंसी ने ‘माय गेट’ ऐप के रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा है कि छात्र कुलकर्णी के घर पहुंचे थे।
CBI के मुताबिक, छात्रों की नोटबुक में लिखे सवालों और कथित रूप से लीक हुए प्रश्नपत्र के बीच भी समानता मिली। कुलकर्णी के मोबाइल से केमिस्ट्री के सवालों की तस्वीरें और उम्मीदवारों तथा उनके अभिभावकों से बातचीत से जुड़े डिजिटल सबूत मिलने का दावा किया गया है।
25 हजार रुपये में फिजिक्स के सवाल देने का आरोप
चार्जशीट में फिजिक्स विषय की विशेषज्ञ मनीषा हवालदार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। CBI के मुताबिक, उन्होंने गोपनीयता की शपथ के बावजूद कथित तौर पर 25 हजार रुपये लेकर फिजिक्स के सवाल उपलब्ध कराए।
जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा से करीब आठ दिन पहले उनके मोबाइल में हाथ से लिखे हुए सवाल मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने ये सवाल दूसरे आरोपी तेजस शाह को लिखवाए, जिसके बाद उन्हें आगे पहुंचाया गया।
वहीं, मनीषा वाघमारे पर छात्रों और विषय विशेषज्ञों के बीच कथित तौर पर कड़ी का काम करने का आरोप है। CBI के अनुसार, उन्होंने अभिभावकों से चार लाख रुपये तक लिए और छात्रों को ऑफलाइन क्लास के लिए भेजा। इसके बाद WhatsApp के जरिए फिजिक्स के कथित लीक सवाल साझा किए गए। आरोप है कि सवाल परीक्षा में आने पर अतिरिक्त 50 हजार रुपये मांगे जाने की बात भी सामने आई।
बायोलॉजी के सवालों की भी कराई गई तैयारी
CBI के मुताबिक, मनीषा गुरुनाथ मंडारे ने अपने घर पर बायोलॉजी की क्लास आयोजित की। आरोप है कि छात्रों को नई NCERT किताबों के कुछ खास पैराग्राफ चिन्हित करवाए गए और उनसे संभावित सवाल लिखवाए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि बाद में उन्हें फिजिक्स के कथित लीक सवालों की कॉपी भी मिली।
सीकर में 40-50 छात्रों तक पहुंची PDF
जांच में राजस्थान के सीकर के एक कोचिंग नेटवर्क का भी जिक्र है। CBI के अनुसार, परीक्षा से एक रात पहले 2 मई को कथित प्रश्नपत्र की PDF करीब 40 से 50 छात्रों के बीच बांटी गई।
एक कोचिंग संचालक ने कथित तौर पर इसे ‘सबसे संभावित प्रश्नपत्र’ बताते हुए छात्रों के बीच प्रसारित किया। परीक्षा के बाद कुछ छात्रों ने वीडियो बनाकर दावा किया कि PDF में मौजूद सवाल वास्तविक परीक्षा में पूछे गए थे।
जांच के दौरान कई WhatsApp ग्रुप भी सामने आए, जिनके जरिए कथित तौर पर सवाल और अन्य जानकारी साझा की गई। CBI ने आरोपियों द्वारा पहचान छिपाने के लिए कोड नाम इस्तेमाल किए जाने की बात भी कही है।
अक्टूबर 2025 से शुरू हो गया था पैसों का खेल
CBI की चार्जशीट के अनुसार, कथित पेपर लीक की साजिश परीक्षा से काफी पहले शुरू हो गई थी। आरोपियों ने अक्टूबर 2025 से ही संभावित उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों से संपर्क करना शुरू कर दिया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, छात्रों से अलग-अलग चरणों में लाखों रुपये लिए गए। कुछ भुगतान नकद और कुछ ऑनलाइन माध्यम से किए जाने का दावा है।
CBI ने इस मामले में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अन्य सबूतों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है।
प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
CBI ने प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके अनुवाद की प्रक्रिया से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रक्रिया के दौरान एक ही विशेषज्ञ को चारों मास्टर सेट देखने का मौका मिलता था। विशेषज्ञों की पर्याप्त तलाशी नहीं होने और पूरे परिसर की निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम नहीं होने जैसी कथित कमियों का भी जिक्र किया गया है।
जांच में दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि बायोलॉजी के कथित लीक सवालों का आधिकारिक प्रश्नपत्र से 90 प्रतिशत तक, जबकि केमिस्ट्री के कुछ सेटों में करीब 100 प्रतिशत तक मिलान पाया गया।
परीक्षा के तुरंत बाद सामने आया था मामला
CBI के अनुसार, 3 मई 2026 को परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक ने कथित लीक PDF और वास्तविक प्रश्नपत्र का मिलान किया। सवालों में समानता मिलने के बाद उन्होंने NTA के महानिदेशक को ईमेल भेजा। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी।
फिलहाल CBI की चार्जशीट पर दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई चल रही है। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
