तेहरान / वॉशिंगटन, 13 जनवरी 2026।
ईरान में खराब होती आर्थिक स्थिति के खिलाफ भड़के जनआंदोलन ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 646 लोगों की मौत हो चुकी है। यह दावा अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने मंगलवार को किया।
एजेंसी ने कहा कि मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि कई इलाकों में अब भी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। HRANA ईरान के भीतर मौजूद एक्टिविस्ट्स के एक नेटवर्क पर निर्भर करती है। हालांकि ईरान में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर भारी रोक के चलते अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पा रही हैं। ईरानी सरकार ने अब तक किसी भी तरह का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों को संदेश जारी किया। उन्होंने कहा,
“मेरे देशवासियो, आप सभी को सलाम जो खड़े हैं और लड़ रहे हैं। यह सरकार दमन, हत्या और कम्युनिकेशन बंद करके आपको डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन आपकी मजबूती ने हजारों मिलिट्री और सिक्योरिटी फोर्स को काम पर जाने से रोक दिया है।”
उन्होंने खास तौर पर इंटरनेट और कम्युनिकेशन सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों से अपील करते हुए कहा कि वे सरकार के इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करें, ताकि ईरानी जनता का दुनिया से संपर्क दोबारा बहाल हो सके।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त तेवर दिखाए हैं। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा,
“सेना इस पर विचार कर रही है और हम कुछ बहुत मजबूत विकल्पों पर काम कर रहे हैं।”
ईरान की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई पर ट्रंप ने चेतावनी दी,
“अगर उन्होंने ऐसा किया तो हम ऐसे स्तर पर हमला करेंगे जैसा पहले कभी नहीं हुआ।”
इसके बाद ट्रंप ने सोमवार को ऐलान किया कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका 25% टैरिफ लगाएगा, जो तुरंत प्रभाव से लागू होंगे।
सूत्रों के मुताबिक ट्रंप और उनकी नेशनल सिक्योरिटी टीम ईरान के खिलाफ कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिनमें साइबर हमले और अमेरिका या इजरायल की ओर से सीधे सैन्य हमले भी शामिल हैं।
ईरान में लगातार बिगड़ते हालात और अमेरिका के आक्रामक रुख के बीच पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े टकराव की आशंका गहराती जा रही है। दुनिया की नजर अब इस पर टिकी है कि यह संकट आगे किस दिशा में जाता है।
