अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े सैन्य हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में भारी तबाही की खबरें हैं। इन घटनाओं के बाद कई देशों में विरोध-प्रदर्शन भड़क उठे हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 फरवरी को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर संभावित कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर सतर्क रहने को कहा है। पत्र में राज्यों से कहा गया है कि वे हालात पर कड़ी नजर रखें और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधियों या उग्र प्रदर्शनों को समय रहते नियंत्रित करें।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने विशेष रूप से “भड़काऊ भाषण देने वाले कट्टरपंथी तत्वों” की पहचान करने और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ाने को कहा है। कई शहरों में ईरान के समर्थन में और हमलों के विरोध में प्रदर्शन देखे जा रहे हैं।
अमेरिका ने दावा किया है कि हालिया हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा नुकसान पहुंचा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद हालात और भड़क गए हैं। हालांकि इन दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जब तक अमेरिका के रणनीतिक उद्देश्य पूरे नहीं होंगे, तब तक अभियान जारी रहेगा।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इजरायल के अलावा कुवैत, यूएई, कतर और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की खबरें हैं। मिसाइल और ड्रोन हमलों में कई ठिकानों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। अमेरिका ने अपने तीन सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है।
मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के मद्देनजर भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। गृह मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वे शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय मजबूत करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर कई देशों की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ सकता है, इसलिए सतर्कता और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
