केरल विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की बढ़त ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। इसी बीच मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से ‘CM’ शब्द हटाने का फैसला चर्चा का केंद्र बन गया है।
मतगणना शुरू होने से ठीक पहले किए गए इस बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। अब उनके प्रोफाइल में केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य होने का जिक्र है।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस कदम को लेकर दो तरह की राय सामने आ रही है।
एक पक्ष का मानना है कि एग्जिट पोल और शुरुआती रुझानों में UDF की बढ़त को देखते हुए यह संभावित हार का संकेत हो सकता है।
वहीं, दूसरे पक्ष के अनुसार यह एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। जब विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होता है और नया जनादेश आने वाला होता है, तो पद से जुड़ी पहचान हटाना एक परंपरागत और नैतिक कदम माना जाता है।
पिनराई विजयन इस बार अपनी पारंपरिक धर्माडम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। UDF के वीपी अब्दुल रशीद और बीजेपी के के रंजीत ने इस सीट को त्रिकोणीय बना दिया है।
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF), जिसने 2021 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, इस बार कड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। अगर मौजूदा रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो केरल में वर्षों पुरानी सत्ता परिवर्तन की परंपरा फिर से लौट सकती है।
केरल में 78% से अधिक मतदान को सत्ता विरोधी लहर के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि विजयन का यह कदम सिर्फ औपचारिकता थी या सत्ता से विदाई का संकेत।
इसके साथ ही तमिलनाडु और पुडुचेरी के नतीजे भी दक्षिण भारत की राजनीति की नई दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
