North Korea ने अपने परमाणु सिद्धांत में बड़ा बदलाव करते हुए संविधान में नया प्रावधान जोड़ा है। इसके तहत यदि सर्वोच्च नेता Kim Jong Un की हत्या हो जाती है या वह विदेशी हमले के कारण नेतृत्व करने में अक्षम हो जाते हैं, तो उत्तर कोरिया की सेना स्वत: परमाणु जवाबी हमला करेगी।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब Iran पर अमेरिका-इजरायल के हमलों और ईरानी नेतृत्व पर कथित “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” की खबरों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं ने प्योंगयांग को अपनी सुरक्षा रणनीति और अधिक आक्रामक बनाने के लिए प्रेरित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह संवैधानिक संशोधन मार्च में आयोजित 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली के सत्र में पारित किया गया। National Intelligence Service ने दक्षिण कोरियाई अधिकारियों को इसकी जानकारी दी है।
संशोधित कानून के अनुसार, यदि उत्तर कोरिया की परमाणु कमांड और कंट्रोल प्रणाली पर हमला होता है, तो “तत्काल और स्वत: परमाणु हमला” शुरू किया जाएगा। हालांकि किम जोंग-उन अब भी परमाणु बलों के सर्वोच्च कमांडर बने रहेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया को डर है कि युद्ध की स्थिति में उसके शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया जा सकता है। सियोल स्थित कूकमिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रेई लैंकोव के मुताबिक, ईरान में हुई घटनाओं ने उत्तर कोरिया को यह संदेश दिया है कि आधुनिक युद्ध में नेतृत्व पर सीधे हमले निर्णायक साबित हो सकते हैं।
इसी बीच, उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया सीमा के पास नई लंबी दूरी की आर्टिलरी तैनात करने की तैयारी भी कर रहा है। सरकारी मीडिया Korean Central News Agency के अनुसार, नई 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड गन-हाउइट्जर को जल्द सीमा पर तैनात किया जाएगा, जिसकी मारक क्षमता सियोल तक बताई जा रही है।
हालांकि हाल के महीनों में दक्षिण कोरिया की ओर से शांति की पहल की गई है, लेकिन उत्तर कोरिया लगातार सियोल और अमेरिका को अपना प्रमुख दुश्मन बताता रहा है।
