
हिंडन एयरबेस पर वायुसेना दिवस की तैयारियों के दौरान भारतीय वायुसेना की ताकत और ऑपरेशनल क्षमता की झलक देखने को मिली। अभ्यास के दौरान Su-30 MKI को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा राफेल, तेजस, आकाश और अन्य विमान व हथियार प्रणालियों ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
ब्रह्मोस से लैस Su-30 MKI की तस्वीर सामने आने के बाद यह संयोजन एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी Su-30 MKI और ब्रह्मोस संयोजन का इस्तेमाल किया गया था।
ब्रह्मोस के साथ Su-30 MKI की ताकत
Su-30 MKI भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसे लंबी दूरी के मिशन, हवाई वर्चस्व और समुद्री अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। विमान में AL-31FP इंजन और थ्रस्ट-वेक्टरिंग तकनीक है, जो इसे हवा में तेजी से दिशा बदलने की क्षमता देती है।
Su-30 MKI में कई हार्डपॉइंट्स हैं और यह बड़ी मात्रा में हथियार ले जाने में सक्षम है। इसके हथियारों में ब्रह्मोस के अलावा अस्त्र, R-77 और R-73 जैसी मिसाइलें शामिल हैं।
ब्रह्मोस की लंबी दूरी और तेज रफ्तार
ब्रह्मोस भारत और रूस के संयुक्त विकास से बनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किए जाने वाले अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए विकसित किया गया है। Su-30 MKI से इसका एयर-लॉन्च संस्करण दागा जा सकता है।
एयरबेस पर प्रदर्शित इस संयोजन ने भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को प्रदर्शित किया। हालांकि, किसी भी सैन्य अभियान में वास्तविक हथियारों की तैनाती और इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग विषय होती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर चर्चा में
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान Su-30 MKI और ब्रह्मोस संयोजन की भूमिका को लेकर काफी चर्चा हुई थी। भारतीय वायुसेना की ओर से विभिन्न प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई थी। इसी वजह से हिंडन एयरबेस पर ब्रह्मोस से लैस Su-30 MKI का प्रदर्शन खास आकर्षण का केंद्र रहा।
वायुसेना दिवस के अभ्यास में राफेल लड़ाकू विमान के साथ स्कैल्प, माइका और मेटियोर मिसाइलों की क्षमता भी प्रदर्शित की गई। इसके अलावा स्वदेशी आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, तेजस, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और रोहिणी रडार भी भारतीय वायुसेना की तकनीकी क्षमता का हिस्सा रहे।
‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड प्रोग्राम
भारतीय वायुसेना अपने Su-30 MKI बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए ‘सुपर सुखोई’ कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। इसके तहत विमानों के एवियोनिक्स, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और हथियार क्षमताओं को आधुनिक बनाया जाना है।
इस आधुनिकीकरण का उद्देश्य Su-30 MKI को आने वाले वर्षों के लिए और अधिक सक्षम बनाना है। स्वदेशी प्रणालियों और हथियारों के एकीकरण से भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी बढ़ावा मिल रहा है।
हिंडन एयरबेस पर वायुसेना दिवस के पूर्वाभ्यास में Su-30 MKI और ब्रह्मोस का एक साथ प्रदर्शन इसी बढ़ती ऑपरेशनल क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों के एकीकरण की झलक पेश करता है।

