अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल को चीन ने ठुकरा दिया है। चीन ने साफ कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ही विश्वास करता है और उसी के अनुरूप काम करता रहेगा।
गाजा में शांति स्थापना के लिए अमेरिका द्वारा गठित किए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के अमेरिकी निमंत्रण को चीन ने अस्वीकार कर दिया है। भारत में चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग (Yu Jing) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर चीन का रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने लिखा,
“चीन को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए अमेरिका का निमंत्रण मिला है, लेकिन चीन हमेशा सच्चे बहुपक्षवाद का पालन करता है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में चाहे जो भी बदलाव हों, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूएन चार्टर के उद्देश्यों व सिद्धांतों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संबंधों की रक्षा करता रहेगा।”
गौरतलब है कि वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका ने 20-सूत्रीय शांति योजना तैयार की है। इसी योजना के दूसरे चरण में ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा पट्टी में शांति और स्थिरता बहाल करना, संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण (Reconstruction) की निगरानी करना और निवेश व फंडिंग को बढ़ावा देना है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में गाजा युद्ध को समाप्त करने की अपनी रणनीति के तहत इस बोर्ड की परिकल्पना की थी।
व्हाइट हाउस के एक बयान के मुताबिक, बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य गाजा में शासन क्षमता निर्माण, सुरक्षा, पुनर्निर्माण, निवेश और फंड जुटाने जैसे अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जो देश 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान करेंगे, उन्हें बोर्ड में स्थायी सदस्यता दी जाएगी। वहीं, योगदान न देने वाले देश भी बोर्ड का हिस्सा बन सकते हैं और वे तीन वर्षों तक बिना भुगतान किए इसमें शामिल रह सकते हैं।
अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के अनुसार, अब तक 25 देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। हालांकि, फ्रांस और चीन जैसे प्रमुख देशों ने इस पहल से दूरी बना ली है।
चीन के इनकार को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अमेरिका की इस पहल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
