नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026:
भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर सहमति हो गई है, जिसे दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल डील” यानी सबसे बड़े व्यापारिक समझौते के रूप में बताया है। इस समझौते से भारत को 27 सदस्य देशों के विशाल यूरोपीय बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात-आयात को नए स्तर पर बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
इस समझौते के तहत भारत और EU के बीच व्यापारिक टैरिफ लगभग 90% से 99% तक कम या समाप्त किए जाएंगे, जिससे भारतीय वस्तुएँ जैसे कि टेक्सटाइल, चमड़ा-जूते, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयाँ, समुद्री उत्पाद और कृषि आधारित वस्तुएँ यूरोपीय बाजार में सस्ती और अधिक प्रतिस्पर्धी होंगी।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इस FTA से अलग-अलग राज्यों की विशेष उत्पाद क्षमताएँ यूरोप में एक्सपोर्ट के अवसर पा सकेंगी। राज्यवार उत्पादों के आधार पर लाभ इस प्रकार हैं।
राज्य मुख्य निर्यात उत्पाद (EU)
पंजाब कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, खेल सामान, कृषि उत्पाद
राजस्थान खेल सामान, हैंडीक्राफ्ट, रत्न-आभूषण, कपड़ा, फर्नीचर
उत्तर प्रदेश चमड़ा-जूते, फर्नीचर, हस्तशिल्प, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उत्पाद
गुजरात कपड़ा, केमिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयाँ, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद
महाराष्ट्र कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयाँ, चिकित्सा उपकरण, रत्न-आभूषण
कर्नाटक इंजीनियरिंग सामान, दवाइयाँ, चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा
तेलंगाना कपड़ा, दवाइयाँ, चिकित्सा उपकरण, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स
आंध्र प्रदेश समुद्री उत्पाद, कपड़ा, दवाइयाँ, चिकित्सा उपकरण
तमिलनाडु कपड़ा, चमड़ा-जूते, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक-रबर सामान
केरल चाय-मसाले, समुद्री उत्पाद, दवाइयाँ, चिकित्सा उपकरण
पश्चिम बंगाल चाय-मसाले, समुद्री उत्पाद, हस्तशिल्प
असम चाय-मसाले, हस्तशिल्प, फर्नीचर, मिनरल्स, दवाइयाँ, चिकित्सा उपकरण
इस समझौते से MSME (लघु एवं मध्यम उद्योग), कृषि आधारित उत्पादन, टेक्सटाइल, चमड़ा तथा जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर को वैश्विक बाजार का बड़ा अवसर मिलेगा। इससे रोज़गार सृजन, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी।
अधिकांश व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि यह FTA भारत के निर्यात को पिछले स्तरों से आगे बढ़ाते हुए वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करेगा, खासकर तब जब कई देशों के साथ व्यापार और निवेश की प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।
