होली का त्योहार हो और रंग-गुलाल के साथ गीत-संगीत की गूंज न हो, तो उत्सव अधूरा सा लगता है। इसी रंगीन माहौल के बीच गढ़वाली गायक दीपक बेंजवाल का नया होली गीत ‘खेलन दे होली’ रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा रहा है।
पहाड़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो केवल उचित मंच की। सोशल मीडिया ने इस कमी को काफी हद तक पूरा किया है। आज उत्तराखंड की अनेक प्रतिभाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी कला को दुनिया तक पहुंचा रही हैं। ऐसे ही कलाकारों में शामिल दीपक बेंजवाल को भी सोशल मीडिया ने पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पेशे से बैंकर दीपक बेंजवाल का यह नया गीत ‘खेलन दे होली’ यूट्यूब पर रिलीज हुआ है। होली के अवसर पर प्रस्तुत यह गीत गढ़वाली संस्कृति की खुशबू को लोगों तक पहुंचा रहा है। गीत में रंगों, संगीत और सच्ची रोमांटिक पहाड़ी भावना का सुंदर समावेश देखने को मिलता है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर संगत और दीपक की सुरीली आवाज गीत को विशेष बनाती है।
यह गीत उत्तराखंड की पारंपरिक ‘खड़ी होली’ और ‘बैठकी होली’ की याद ताजा करता है। साथ ही ‘झुमैलो’ और ‘चौंफला’ जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की झलक भी इसमें देखने को मिलती है। गीत के माध्यम से दीपक ने होली को केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि लोकगीतों और नृत्य का जीवंत उत्सव के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
पहाड़ी बोली के सरल और आत्मीय शब्द युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। विशेष रूप से पहाड़ के युवाओं के बीच दीपक के गीत अपनी ताजगी और पारंपरिक भावनाओं के कारण काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। ‘खेलन दे होली’ के माध्यम से नई पीढ़ी को उत्तराखंडी लोकसंगीत से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का संदेश भी दिया गया है।
होली के इस रंगीन पर्व पर दीपक बेंजवाल का यह गीत पहाड़ की संस्कृति और परंपरा को नई ऊर्जा के साथ प्रस्तुत कर रहा है।
