मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच Vladimir Putin ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि Russia यूरोपीय देशों को तेल और गैस की आपूर्ति करने के लिए तैयार है, बशर्ते सहयोग दीर्घकालिक और राजनीतिक दबाव से मुक्त हो।
पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब Iran पर United States और Israel की ओर से हुए हमलों के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, Russia–Ukraine War शुरू होने के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मॉस्को एशिया के भरोसेमंद साझेदारों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के सदस्य देशों Hungary और Slovakia को भी तेल की आपूर्ति जारी रखने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि यदि यूरोपीय कंपनियां और खरीदार दीर्घकालिक और स्थिर सहयोग के लिए तैयार होते हैं और रूस पर राजनीतिक दबाव नहीं डाला जाता, तो रूस उनके साथ काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पुतिन ने जोर देकर कहा, “हमने कभी यूरोप को तेल और गैस देने से मना नहीं किया।”
गौरतलब है कि European Union ने 2022 में रूस से समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा Druzhba Pipeline को हुए नुकसान के कारण जनवरी से हंगरी और स्लोवाकिया को रूस का तेल निर्यात भी बाधित हो गया था।
पुतिन का यह बयान Viktor Orbán की उस अपील के कुछ घंटों बाद आया, जिसमें उन्होंने यूरोपीय संघ से रूस के तेल और गैस पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की मांग की थी।
ओर्बान का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति को फिर से शुरू करना जरूरी हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस और यूरोप के बीच ऊर्जा सहयोग दोबारा शुरू होता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
