वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते टकराव के बीच 200 अरब डॉलर की भारी फंडिंग की मांग की है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 मार्च 2026 को ओवल ऑफिस में साने ताकाइची के साथ बैठक के दौरान कहा कि वह फिलहाल किसी भी क्षेत्र में अमेरिकी सेना नहीं भेजेंगे। उन्होंने साफ किया कि “अगर ऐसा करता भी, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता।”
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव के दौरान ईरान ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, हमले के बाद विमान का भविष्य स्पष्ट नहीं है।
वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि फाइटर जेट को कॉम्बैट मिशन के दौरान मिडिल ईस्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस से 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। हालांकि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने राशि की पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि “बुरे लोगों को खत्म करने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है” और इसके लिए कांग्रेस से सहयोग मांगा गया है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने संयुक्त बयान जारी कर सुरक्षित समुद्री आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयासों में सहयोग की बात कही है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि अब तक उनकी प्रतिक्रिया सीमित रही है, लेकिन अगर ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला हुआ तो ईरान कोई संयम नहीं बरतेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह टकराव वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। फिलहाल युद्ध खत्म होने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
