नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अहम संबोधन दिया। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के वैश्विक असर को देखते हुए सरकार की तैयारियों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात का असर वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति, सप्लाई चेन और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर रही है।
नरेंद्र मोदी ने बताया कि सरकार ने संभावित वैश्विक ईंधन संकट को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर तैयारी की है। इसके तहत तेल आयात, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और व्यापार पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है, ताकि किसी भी स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि किसानों के लिए खाद की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार किया जा रहा है। हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम एशिया के हालात की समीक्षा की गई। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बढ़ते तनाव का भारत के ऑयल इम्पोर्ट, उर्वरक आपूर्ति और व्यापार पर क्या असर पड़ सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
