अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव उस समय और बढ़ गया जब फ्रांस ने अमेरिका के सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस फैसले पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांस को ‘गैर-सहयोगी’ बताया और कड़ी चेतावनी दी।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि फ्रांस ने इजरायल जा रहे सैन्य विमानों को अपने एयरस्पेस से गुजरने की अनुमति नहीं दी, जो ‘ईरान के खिलाफ कार्रवाई’ के लिए अहम थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस रवैये को याद रखेगा।
इस घटनाक्रम के बाद इजरायल ने बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस को रक्षा उपकरणों की बिक्री रोक दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला फ्रांस के पिछले दो वर्षों से चले आ रहे ‘शत्रुतापूर्ण रवैये’ के कारण लिया गया है।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इस संबंध में आदेश जारी किया, जिसे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहमति के बाद लागू किया गया।
सूत्रों के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा अमेरिकी विमानों को एयरस्पेस उपयोग की अनुमति न देना इस विवाद की ‘आखिरी कड़ी’ साबित हुआ, जिसके बाद इजरायल ने सख्त कदम उठाया।
इस बीच इटली ने भी अमेरिका को अपने सिगोनेला एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेट्टो ने कहा कि अमेरिका ने पहले से अनुमति नहीं ली थी, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने भी अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई का विरोध किया है। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
फ्रांस के एयरस्पेस इनकार के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब अमेरिका, इजरायल और यूरोप के कई देशों के बीच कूटनीतिक तनाव में बदल गया है। इससे पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के और गहराने की आशंका बढ़ गई है।
