नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz से भारत आने वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन साल्वी’ सुरक्षित रूप से आगे बढ़ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह टैंकर 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत की ओर आ रहा है। खास बात यह है कि यह तीन भारतीय एलपीजी जहाजों के काफिले का नेतृत्व कर रहा है। क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच यह सातवां मौका है जब कोई भारतीय पोत इस अहम समुद्री मार्ग को सुरक्षित पार करने में सफल रहा है।
इस सुरक्षित पारगमन के पीछे भारत की सक्रिय ‘ऊर्जा कूटनीति’ को अहम माना जा रहा है। India और Iran के बीच उच्च स्तरीय वार्ताओं के बाद ईरान ने इन जहाजों को “मित्र राष्ट्र” के पोत के रूप में अनुमति दी है।
बताया जा रहा है कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की नौसेना ने इन जहाजों के सुरक्षित गुजरने में सहयोग किया, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।
मौजूदा हालात को देखते हुए ‘ग्रीन साल्वी’ और उसके साथ चल रहे अन्य जहाजों ने ओमान तट के पास दक्षिणी मार्ग अपनाया है। आमतौर पर जहाज उत्तरी लेन से गुजरते हैं, जो ईरानी नियंत्रण के अधिक करीब होती है।
👉 विशेषज्ञों के अनुसार:
दक्षिणी मार्ग अपेक्षाकृत सुरक्षित है
इससे किसी भी सैन्य टकराव या जोखिम की संभावना कम होती है
🇮🇳 भारत के लिए क्यों अहम?
भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में इस टैंकर की सुरक्षित यात्रा से:
घरेलू गैस आपूर्ति बनी रहेगी
कीमतों में संभावित उछाल रोका जा सकेगा
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
👉 हालांकि “28 फरवरी को ईरान पर हमले” जैसी बातें कुछ रिपोर्ट्स में कही जा रही हैं, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे सावधानी से देखा जाना चाहिए।
पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में अहम सफलता हासिल की है। आने वाले समय में यदि अन्य टैंकर भी सुरक्षित पार हो जाते हैं, तो यह भारत की ऊर्जा कूटनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
