चारधाम यात्रा के दौरान कर्णप्रयाग में सिख तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के विवाद में खूब तलवारें चलीं ,पत्थर और लाठियों का भी भरपूर प्रयोग हुआ।
उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में पंच पुलिया के पास एक स्थानीय होटल के बाहर पार्किंग और मामूली विवाद को लेकर सिख तीर्थयात्रियों और स्थानीय होटल कर्मचारियों के बीच हिंसक झड़प में पांच लोग घायल हो गए। आक्रोशित स्थानीय लोगों ने बद्रीनाथ नेशनल हाईवे को 4 घंटे तक जाम कर दिया।
पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज किया है। वहीं घटना के बाद हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट ने भी श्रद्धालुओं से शांति, संयम और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील करते हुए यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से शस्त्र साथ न लाने का आग्रह किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को कर्णप्रयाग बाजार स्थित कृष्णा पैलेस होटल के समीप हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे कुछ निहंग यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के बीच मामूली कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर प्रकाश रावत पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य स्थानीय लोगों पर भी हमला हुआ, जिससे कुल चार लोग घायल हो गए। इनमें एक घायल को गंभीर हालत में एयर एम्बुलेंस से देहरादून भेजा गया, जबकि अन्य तीन का उपचार स्थानीय स्तर पर किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हमले में शामिल चार निहंग यात्रियों को हिरासत में ले लिया। गजपाल सिंह की तहरीर पर कोतवाली कर्णप्रयाग में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। घटना के बाद कुछ समय के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थानीय नागरिकों से वार्ता कर माहौल को शांत कराया। प्रशासन और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से यातायात बहाल कर दिया गया। साथ ही चारधाम यात्रा मार्ग पर वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए अन्य जनपदों से भी समन्वय किया गया। फंसे हुए यात्रियों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था भी की गई।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि चारधाम यात्रा सामान्य रूप से संचालित हो रही है और जनपद में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।
वहीं एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर अशांति फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इधर, घटना के बाद गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट, गोविंदघाट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने श्रद्धालुओं के नाम जारी अपील में कहा है कि यात्रा आस्था, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। श्रद्धालु यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के विवाद से बचें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म में शस्त्रों का महत्व धर्म और मानवता की रक्षा के लिए है, न कि उनके प्रदर्शन या दुरुपयोग के लिए। इसलिए श्रद्धालु अनावश्यक रूप से शस्त्र लेकर यात्रा पर न आएं। विशेष रूप से बच्चों को किसी भी प्रकार के शस्त्र साथ रखने से रोका जाए।
ट्रस्ट ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि और शांतिप्रिय राज्य के रूप में देश-दुनिया में प्रतिष्ठित है। यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी है कि वे यात्रा की गरिमा बनाए रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय प्रशासन और पुलिस की मदद लें। फिलहाल कर्णप्रयाग में स्थिति सामान्य बताई जा रही है तथा पुलिस-प्रशासन पूरे क्षेत्र में सतर्क निगरानी बनाए हुए है।
हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान कर्णप्रयाग में हुई हिंसक घटना ने प्रशासन और यात्रा प्रबंधन से जुड़े संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।
कर्णप्रयाग हिंसा और विवाद के मुख्य बिंदु
विवाद की वजह- हेमकुंड साहिब जा रहे सिख तीर्थयात्रियों (निहंग) का एक जत्था रुका था, और स्थानीय होटल के बाहर वाहन पार्क करने को लेकर विवाद शुरू हुआ।
हिंसक झड़प- बहस बढ़ने पर हाथापाई हुई और आरोप है कि तीर्थयात्रियों ने तलवारों से हमला कर दिया।
घायल-
इसमें 4 स्थानीय निवासी (प्रकाश रावत, सुदर्शन कंडारी, गजपाल सिंह, और हरेंद्र सिंह) और एक तीर्थयात्री (मनप्रीत सिंह) घायल हो गए।
प्रदर्शन और जाम- घटना से गुस्साए स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-07) को जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गई।
चमोली के जिलाधिकारी (गौरव कुमार) और एसपी (सुरजीत सिंह पंवार) ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की।
प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने हाईवे से जाम हटा लिया।
स्थानीय लोगों ने तीर्थयात्रा के दौरान धारदार हथियार ले जाने पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की
